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8th Pay Commission: महंगाई भत्ता की धीमी चाल से 8वें वेतन आयोग में क्यों बढ़ सकती है सैलरी

8th Pay Commission: महंगाई भत्ता की धीमी चाल से 8वें वेतन आयोग में क्यों बढ़ सकती है सैलरी
8th Pay Commission: महंगाई भत्ता की धीमी चाल कैसे बढ़ा सकती है सैलरी का असर (File Photo)

सातवें वेतन आयोग में महंगाई भत्ता की धीमी बढ़ोतरी अब आठवें वेतन आयोग में कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। डीए के कम स्तर से नई बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है, जिससे कुल वेतन और पेंशन में अच्छी बढ़ोतरी संभव है।

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Asfi Shadab
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केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों के लिए महंगाई भत्ता यानी डीए हमेशा एक अहम मुद्दा रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच यही भत्ता उनकी आमदनी को कुछ हद तक संभालता है। लेकिन सातवें वेतन आयोग के दौरान डीए की बढ़ोतरी की रफ्तार काफी धीमी रही है। जानकार मानते हैं कि यही धीमी चाल आगे चलकर आठवें वेतन आयोग में बड़ी राहत बन सकती है।

महंगाई भत्ता का मकसद ही यही होता है कि बाजार में बढ़ती कीमतों का असर कर्मचारियों की जेब पर कम पड़े। हर साल जनवरी और जुलाई से डीए बढ़ाया जाता है, जिसकी घोषणा आमतौर पर मार्च और अक्टूबर में होती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह बढ़ोतरी उम्मीद से कम रही है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो उस समय डीए और पेंशनर्स को मिलने वाला डीआर शून्य यानी 0 प्रतिशत से दोबारा शुरू होता है। ऐसे में जितना कम डीए पुराने वेतन आयोग में रहता है, उतना ही ज्यादा फायदा नए वेतन आयोग में मिलने वाली सैलरी बढ़ोतरी का असर दिखाता है।

सातवें वेतन आयोग में महंगाई भत्ता क्यों रहा कम

सातवें वेतन आयोग की शुरुआत के बाद से अब तक डीए की बढ़ोतरी पहले के वेतन आयोगों की तुलना में काफी धीमी रही है। इसका एक बड़ा कारण कोविड काल रहा। महामारी के दौरान सरकार ने करीब 18 महीनों तक डीए और डीआर की बढ़ोतरी पर रोक लगा दी थी। इसका मकसद सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ को संभालना था।

इस रोक की वजह से कर्मचारियों को उस समय कोई बढ़ोतरी नहीं मिली, जबकि महंगाई लगातार बढ़ती रही। बाद में जब बढ़ोतरी शुरू हुई भी, तो वह धीरे-धीरे हुई। यही वजह है कि आज सातवें वेतन आयोग में डीए करीब 58 प्रतिशत पर है।

पुराने वेतन आयोगों का क्या रहा पैटर्न

अगर पिछले वेतन आयोगों की बात करें, तो तस्वीर अलग दिखती है। छठे वेतन आयोग के दौरान डीए बढ़कर बेसिक सैलरी का करीब 125 प्रतिशत तक पहुंच गया था। वहीं, पांचवें वेतन आयोग में यह आंकड़ा लगभग 74 प्रतिशत रहा था।

इन दोनों के मुकाबले सातवें वेतन आयोग में डीए काफी नीचे है। मार्च में होने वाली अगली समीक्षा के बाद इसके लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन फिर भी यह पुराने स्तर से काफी कम ही रहेगा।

आठवें वेतन आयोग से पहले कितनी बढ़ोतरी संभव

सरकार ने नवंबर 2025 में आठवें वेतन आयोग का गठन कर दिया है। इसे अपनी रिपोर्ट देने के लिए करीब 18 महीने का समय मिला है। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट 2027 के मध्य से पहले पेश नहीं होगी।

इस दौरान डीए में कम से कम तीन बार और बढ़ोतरी होनी है। एक बार मार्च 2026 में, दूसरी बार अक्टूबर 2026 में और तीसरी बार मार्च 2027 में। अगर हर बार औसतन 2 से 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो आठवें वेतन आयोग से पहले डीए करीब 70 प्रतिशत के आसपास पहुंच सकता है।

डीए कम होने से कैसे होगा फायदा

यह बात थोड़ी उलटी लग सकती है, लेकिन जानकार मानते हैं कि डीए का कम स्तर कर्मचारियों के लिए फायदेमंद हो सकता है। जब नया वेतन आयोग लागू होता है, तो डीए शून्य से शुरू होता है और बेसिक सैलरी को नए सिरे से तय किया जाता है।

अगर पुराने वेतन आयोग में डीए बहुत ज्यादा होता है, तो नई सैलरी बढ़ोतरी का असर उतना साफ नहीं दिखता। लेकिन डीए अगर कम हो, तो नई बेसिक सैलरी में अच्छा उछाल आता है, जिससे कुल वेतन में बड़ा फर्क नजर आता है।

पेंशनर्स के लिए क्या मायने

पेंशन पाने वालों के लिए भी यही नियम लागू होता है। उन्हें मिलने वाला डीआर भी नए वेतन आयोग के साथ शून्य से शुरू होता है। ऐसे में आठवें वेतन आयोग के लागू होने पर पेंशन में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

हालांकि, यह सब सरकार की अंतिम रिपोर्ट और फैसले पर निर्भर करेगा। अभी तक सिर्फ अनुमान और पुराने अनुभवों के आधार पर ही बातें कही जा रही हैं।

कर्मचारियों की नजर सरकार पर

केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स अब सरकार की अगली घोषणाओं पर नजर बनाए हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि आठवां वेतन आयोग उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करेगा और महंगाई के असर से कुछ राहत देगा।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।