Rashtra Bharat Logo

उत्तर भारत में जनवरी तक घना कोहरा और कड़ाके की ठंड, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

उत्तर भारत में जनवरी तक घना कोहरा और कड़ाके की ठंड, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी
Cold Alert: उत्तर भारत में जनवरी तक घना कोहरा, बिहार में ऑरेंज अलर्ट जारी (File Photo)

भारतीय मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में एक जनवरी तक घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। बिहार में शीतलहर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जहां तापमान 7.4 डिग्री तक गिर गया। राजस्थान और झारखंड में भी शीतलहर चलने की आशंका है। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी है।

Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

देशभर में कड़ाके की ठंड का सितम जारी

देश के उत्तरी और मध्य राज्यों में इन दिनों कड़ाके की ठंड ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। सुबह और शाम के समय घना कोहरा छा जाने से दिक्कतें और भी बढ़ गई हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को कई राज्यों के लिए विशेष चेतावनी जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में ठंड का असर और बढ़ने वाला है।

जनवरी तक जारी रहेगा घने कोहरे का दौर

मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में एक जनवरी 2026 तक बहुत घना कोहरा पड़ने की संभावना है। इन राज्यों में रहने वाले लोगों को खासतौर पर सुबह और रात के समय बाहर निकलते वक्त सावधानी बरतनी होगी। घने कोहरे की वजह से दृश्यता बहुत कम हो जाती है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है।

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 30 दिसंबर तक घने कोहरे की स्थिति बनी रहेगी। बिहार में 27 दिसंबर तक और असम तथा मेघालय में 26 दिसंबर तक घना कोहरा देखने को मिलेगा। यह स्थिति आम लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रही है और यातायात व्यवस्था में भी बाधा उत्पन्न कर रही है।

कोल्ड डे से गंभीर कोल्ड डे तक की चेतावनी

मौसम विभाग ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए 26 और 27 दिसंबर को कोल्ड डे से लेकर गंभीर कोल्ड डे की स्थिति की चेतावनी दी है। इसका मतलब है कि इन दिनों अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे रहेगा और दिन के समय भी ठंड का एहसास होगा।

पश्चिम बंगाल में 26 दिसंबर को कोल्ड डे की स्थिति रहेगी। बिहार में 26 से 30 दिसंबर तक, उत्तराखंड में 26 से 28 दिसंबर तक और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 26 और 27 दिसंबर तक कोल्ड डे की स्थिति बनी रहेगी। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करना और बाहर कम से कम निकलना जरूरी है।

शीतलहर का कहर कई राज्यों में

उत्तरी राजस्थान में 27 दिसंबर को शीतलहर चलने की आशंका है। वहीं झारखंड में 27 और 28 दिसंबर को कोल्ड वेव चलने की संभावना जताई गई है। शीतलहर से बचाव के लिए बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि इसका सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ता है।

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में अगले चार से पांच दिनों तक न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं आने वाला है। लेकिन उसके बाद तापमान में लगभग तीन डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

पिछले 24 घंटों का तापमान रिकॉर्ड

पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू कश्मीर और लद्दाख में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। इन इलाकों में ठंड का असर सबसे ज्यादा महसूस किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा में न्यूनतम तापमान 5 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।

पंजाब, उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी तापमान इसी रेंज में दर्ज किया गया। ठंड की इस मार से राहत पाने के लिए लोग अलाव जलाकर और हीटर का इस्तेमाल करके खुद को गर्म रखने की कोशिश कर रहे हैं।

बिहार में शीतलहर का भयंकर प्रकोप

बिहार में इन दिनों शीतलहर का भयंकर प्रकोप देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में अत्यधिक घने कोहरे के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट खतरे की गंभीरता को दर्शाता है और लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत बताता है।

शुक्रवार को बिहार के कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया। राज्य का औरंगाबाद और भागलपुर का सबौर क्षेत्र सबसे सर्द स्थान रहा, जहां तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। यह इस सीजन का अब तक का सबसे कम तापमान है।

आम जनजीवन पर असर

ठंड और कोहरे की वजह से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। रेलवे और हवाई यातायात में देरी हो रही है। कई ट्रेनें समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं और फ्लाइट्स भी प्रभावित हो रही हैं। सड़कों पर घने कोहरे की वजह से दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को खासी परेशानी हो रही है।

खेती-किसानी पर भी इस मौसम का असर पड़ रहा है। रबी की फसलों को ठंड और कोहरे से नुकसान हो सकता है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी फसलों की देखभाल में विशेष ध्यान दें।

मौसम विभाग की सलाह

मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह और रात के समय बाहर निकलने से बचें। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो गर्म कपड़े पहनें। वाहन चालकों को धीमी गति से वाहन चलाने और फॉग लाइट का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। बुजुर्गों और बच्चों को ठंड से विशेष सुरक्षा की जरूरत है।

घरों में हीटर या अलाव का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें क्योंकि इनसे दुर्घटना की आशंका रहती है। कमरों में पर्याप्त हवा का आवागमन सुनिश्चित करें। गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें और पौष्टिक भोजन लें जिससे शरीर को ठंड से लड़ने की ताकत मिले।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।
Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।