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राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी को नमन किया, कहा – उनका साहस अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े रहने की प्रेरणा देता है

राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी को नमन किया, कहा – उनका साहस अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े रहने की प्रेरणा देता है
Rahul Gandhi Tribute: इंदिरा गांधी की जन्म-जयंती पर राहुल का भावपूर्ण नमन (Photo: IANS)
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Asfi Shadab
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इंदिरा गांधी की जन्म-जयंती पर राहुल गांधी का श्रद्धांजलि संदेश

राष्ट्र की तीसरी प्रधानमंत्री और भारत की लौह महिला कही जाने वाली इंदिरा गांधी की जयंती के अवसर पर, कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को नई दिल्ली में श्रद्धासुमन अर्पित किए। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि उनकी दादी इंदिरा गांधी का साहस, राष्ट्रनिष्ठा और नैतिक मूल्य आज भी उन्हें अन्याय के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े रहने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

राहुल गांधी ने सामाजिक मंच एक्स पर लिखा कि उनकी दादी से उन्हें निर्भीक निर्णय लेने की प्रेरणा मिली है और हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सीख उन्होंने उनसे ही पाई। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी का अदम्य साहस और राष्ट्रहित के प्रति अटूट समर्पण आज भी उनके विचारों और कार्यों को दिशा देता है।

कांग्रेस नेतृत्व द्वारा सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि

बुधवार प्रातः कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने शक्ति स्थल पर पहुंचकर इंदिरा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। राहुल गांधी के साथ कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने इस अवसर पर उपस्थित होकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी एक्स पर अपने संदेश में लिखा कि इंदिरा गांधी का उदाहरणीय और गतिशील नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी की राष्ट्र एकता और अखंडता को सुरक्षित रखने की अटूट प्रतिबद्धता सदैव स्मरणीय रहेगी।

खड़गे ने यह भी लिखा कि राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान करोड़ों भारतीयों के लिए वंदनीय है।

इंदिरा गांधी: भारत की लौह महिला का प्रेरक जीवन

इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवम्बर 1917 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। वे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और कमला नेहरू की पुत्री थीं। बचपन से ही उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलनों, राजनीतिक गतिविधियों और स्वतंत्रता संघर्ष को निकट से देखा, जिसने उनके भीतर राष्ट्र के प्रति गहरा दायित्वबोध उत्पन्न किया।

उनके जीवन का अधिकांश समय भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में व्यतीत हुआ। वे दो बार देश की प्रधानमंत्री रहीं—पहली बार 1966 से 1977 तक और फिर 1980 से 1984 तक, जब उनकी हत्या कर दी गई।

राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व और इंदिरा गांधी की भूमिका

इंदिरा गांधी की जन्म-जयंती के अवसर पर प्रतिवर्ष 19 नवम्बर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस न केवल इंदिरा गांधी की स्मृति से जुड़ा है, बल्कि भारतीय समाज में विविधता के बीच एकता की भावना को सुदृढ़ करने का भी प्रतीक है।

राष्ट्रीय एकता दिवस की स्थापना 1985 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा की गई थी, ताकि इंदिरा गांधी के उस योगदान को सम्मान दिया जा सके जिसने देश को एकसूत्रता से बांधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत आज जिस विकास पथ पर अग्रसर है, उसमें सामाजिक सौहार्द, विभिन्न समुदायों के बीच एकजुटता और राष्ट्रीय पहचान की संरचना में इंदिरा गांधी की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है।

1971 का भारत-पाक युद्ध: इंदिरा गांधी का निर्णायक नेतृत्व

इंदिरा गांधी की राजनीतिक यात्रा का एक सबसे प्रमुख अध्याय 1971 का भारत-पाक युद्ध है, जिसने उनके नेतृत्व कौशल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। इस युद्ध का परिणाम भारत की ऐतिहासिक विजय और बांग्लादेश के निर्माण के रूप में सामने आया।

इस दौर में इंदिरा गांधी ने न केवल राजनीतिक दृढ़ता दिखाई बल्कि मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए भी निर्णायक कदम उठाए। पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान में चलाए जा रहे दमन के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया ने दुनिया को यह संदेश दिया कि लोकतांत्रिक राष्ट्र होने के बावजूद भारत अपनी सीमाओं और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए कठोर निर्णय लेने में सक्षम है।

विविधता में एकता के सूत्र को मजबूत करने की दिशा में प्रयास

अपने राजनीतिक जीवन के दौरान इंदिरा गांधी ने सदैव यह कहा कि भारत की आत्मा उसकी विविधता में बसती है। उन्होंने विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों, समुदायों और क्षेत्रों को एक राष्ट्रीय पहचान में पिरोने के लिए कई योजनाएं और नीतियां लागू कीं।

चाहे वह हरित क्रांति के माध्यम से खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना हो या बैंक राष्ट्रीयकरण के माध्यम से आर्थिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाना, इंदिरा गांधी की नीतियों ने देश के सामाजिक आधार को मजबूत किया।

राहुल गांधी की राजनीति पर इंदिरा गांधी की छाप

राहुल गांधी अक्सर विभिन्न मंचों पर इंदिरा गांधी का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि उनके विचारों का आधार उनकी दादी की शिक्षाओं में निहित है। न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का जो भाव राहुल गांधी के राजनीतिक अभियानों में दिखाई देता है, उसका स्रोत वे इंदिरा गांधी की प्रतिबद्धता और साहस को मानते हैं।

आज जब वे संसद से लेकर सड़क तक विभिन्न मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते हैं, तो वे स्वयं स्वीकार करते हैं कि यह प्रेरणा उनकी दादी के जीवन और कार्यों से मिली है। उनकी श्रद्धांजलि इसी भावनात्मक संबंध की अभिव्यक्ति है।

राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता की दृष्टि से यह श्रद्धांजलि क्यों महत्वपूर्ण

इंदिरा गांधी के विचार आज भी भारत में प्रासंगिक हैं, विशेष रूप से उस समय जब सामाजिक विभाजन, राजनीतिक वैमनस्य और क्षेत्रीय असंतुलन जैसी चुनौतियाँ देश के सामने हैं।

राहुल गांधी द्वारा व्यक्त श्रद्धांजलि केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उन मूल्यों के प्रति पुनर्स्मरण है जिन्हें इंदिरा गांधी ने अपने जीवन में आत्मसात किया और जिनके लिए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया।

उनकी यह भावनात्मक अभिव्यक्ति नए भारत में एकता, न्याय और समानता के महत्व को रेखांकित करती है।

यह समाचार IANS एजेंसी के इनपुट के आधार पर प्रकाशित किया गया है।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।