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गाजा की सुरंगों में इजरायल की बड़ी सफलता, नौ साल बाद लापता सैनिक के अवशेष मिले

गाजा की सुरंगों में इजरायल की बड़ी सफलता, नौ साल बाद लापता सैनिक के अवशेष मिले
Israel Gaza Tunnel Discovery: इजरायल को हमास की सुरंग से नौ साल बाद सैनिक के अवशेष मिले (File Photo)

इजरायली सेना ने गाजा की 7 किलोमीटर लंबी सुरंग में 2014 से लापता लेफ्टिनेंट हदार गोल्डिन के अवशेष बरामद किए। सुरंग में 80 कमरे और कई संवेदनशील स्थलों के नीचे मार्ग मिले। हमास की गिरफ्तारी भी हुई। संघर्ष विराम के बावजूद क्षेत्र में हमले और तनाव जारी हैं।

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Asfi Shadab
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गाजा पट्टी में जारी सैन्य अभियानों के बीच इजरायल को एक बड़ी और भावनात्मक सफलता मिली है। इजरायली सेना ने उन सुरंगों में 2014 से लापता अपने सैनिक के अवशेष बरामद किए हैं जिन्हें हमास ने वर्षों से छिपाकर रखा था। यह खोज न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इजरायल के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान और शोक का प्रतीक भी है। इस अभियान ने गाजा के नीचे मौजूद उस भयावह सुरंग नेटवर्क का भी खुलासा किया है, जिसे लंबे समय से हमास अपनी रणनीति के लिए उपयोग कर रहा था।

गाजा के नीचे छिपा विशाल सुरंग नेटवर्क

इजरायली सेना ने अपने हाल के अभियान में गाजा पट्टी के रफा क्षेत्र की घनी आबादी के नीचे एक बेहद जटिल सुरंग नेटवर्क का पता लगाया। यह सुरंग संयुक्त राष्ट्र फिलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी, मस्जिदों, क्लीनिकों और किंडरगार्टन के नीचे से गुजरती है। इस सुरंग का नेटवर्क लगभग 7 किलोमीटर तक फैला हुआ है और 25 मीटर की गहराई में मौजूद है। सेनाओं के मुताबिक इसमें लगभग 80 कमरे मिले हैं, जो संभवतः हमास के युद्ध संचालन, हथियारों के भंडारण और बंधक रखे जाने के लिए इस्तेमाल होते थे।

इजरायली सेना ने सोशल मीडिया पर साझा एक वीडियो में इन सुरंगों की झलक दिखाई है। इन सुरंगों को देखकर स्पष्ट होता है कि इन्हें आम लोगों के बीच छिपाने की एक सुनियोजित रणनीति के तहत बनाया गया था, जिससे हमास को सुरक्षित ठिकाना मिलता रहे और कोई भी सैन्य हमला आम नागरिकों के बीच भारी नुकसान के भय के कारण मुश्किल हो जाए। यह नेटवर्क केवल सुरंग नहीं, बल्कि भूमिगत शहर जैसा प्रतीत होता है जिसका उद्देश्य हमास को शक्तिशाली बनाना था।

नौ साल बाद मिले हदार गोल्डिन के अवशेष

2014 के सैन्य अभियान के दौरान हमास ने इजरायल के लेफ्टिनेंट हदार गोल्डिन को कैद कर लिया था। तब से गोल्डिन न केवल इजरायली राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे, बल्कि जनता के भावनात्मक अभियान का भी केंद्र बने रहे। इजरायल ने वर्षों तक गोल्डिन को वापस लाने के उद्देश्य से कई अभियान चलाए, पर सफलता नहीं मिली। लेकिन अब इजरायली सेना ने पुष्टि कर दी है कि बरामद शव के अवशेष उन्हीं के हैं।

यह खोज उस समय हुई जब IDF जुलाई के बाद से लगातार गोल्डिन की खोज में अभियान चला रही थी। इजरायल के लिए एक सैनिक को वापस लाना केवल न्याय का विषय नहीं बल्कि राजनीतिक और नैतिक दायित्व का प्रतीक भी माना जाता है। इस सुरंग से हमास के आतंकी अल-हम्स की गिरफ्तारी भी हुई है, जो गोल्डिन की हत्या में शामिल था। इजरायली सेना के अनुसार यह गिरफ्तारी इस पूरे मामले की साजिश और इतिहास को स्पष्ट करती है।

गाजा में संघर्ष जारी, युद्धविराम कमजोर

हालांकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में हुए संघर्ष विराम के बाद भी हिंसा कम नहीं हुई है। गुरुवार को इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमले में खान यूनिस क्षेत्र में पांच लोगों की मौत हुई। गाजा में पिछले छह सप्ताह से युद्धविराम लागू है, लेकिन इसकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

इजरायल और हमास दोनों एक-दूसरे पर युद्धविराम की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। हमास ने दावा किया है कि इजरायल लगातार नागरिकों पर हमले कर रहा है, जबकि इजरायल का आरोप है कि हमास सुरंगों और नागरिक बस्तियों के पीछे छिपकर उकसावे कर रहा है और हमला जारी रखता है। इस लगातार तनाव ने न केवल युद्धविराम को कमजोर कर दिया है बल्कि क्षेत्र में संभावित बड़े संघर्ष की आशंका भी बढ़ा दी है।

गाजा की सुरंगें और मानवीय संकट का बोझ

गाजा में वर्षों से जारी संघर्ष के बीच सुरंगें केवल युद्ध रणनीति नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के लिए भय का प्रतीक बन चुकी हैं। हमास इन सुरंगों का उपयोग हथियारों के भंडारण और सैनिक अभियानों के लिए करता रहा, लेकिन इसके परिणामस्वरूप जब भी इजरायल इन्हें निशाना बनाता है तो सबसे अधिक नुकसान आम जनता को झेलना पड़ता है। गाज़ा में रहने वाले नागरिक न घरों में सुरक्षित महसूस करते हैं, न ही किसी संस्थान में। यह सुरंग नेटवर्क सैन्य ताकत का तरीका होने के साथ-साथ स्थानीय आबादी के लिए अनचाहा अभिशाप बन गया है।

इजरायल की राष्ट्रीय भावना में सैनिकों की अहमियत

इजरायल की सेना और वहां की सरकार अपने हर सैनिक को राष्ट्र के सम्मान का हिस्सा मानती है। इसी परंपरा के चलते हदार गोल्डिन की खोज नौ वर्षों तक जारी रही। उनके अवशेष मिलने के बाद इजरायल में फिर एक बार सैनिकों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव की चर्चा जोर पकड़ रही है। यह खोज किसी सैन्य उपलब्धि से कम नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे राष्ट्रीय सम्मान की वापसी जैसा माना जा रहा है, जहां एक सैनिक का शरीर भी देश के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उसकी सेवा।

सुरंगों ने बदल दिया युद्ध का तरीका

गाजा की सुरंगों को लेकर विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पारंपरिक युद्ध को बदलने वाली रणनीति है। अरब विश्व में कई सेनाओं ने भूमिगत युद्ध के मॉडल को अपनाया है, लेकिन गाजा का नेटवर्क इसके पैमाने और जटिलता के कारण अभूतपूर्व माना जाता है।

गाजा में मौजूद सुरंगें एक ओर सैन्य गठजोड़ और हथियारों की सप्लाई बढ़ाती हैं, वहीं दूसरी ओर वे स्थानीय लोगों के जीवन को खतरे में डालती हैं क्योंकि सैन्य हमले अक्सर इन सुरंगों को नष्ट करने के लिए किए जाते हैं और इसमें आम जनता मारी जाती है। यही कारण है कि यह मुद्दा सैन्य से अधिक मानवीय संकट के रूप में उभर रहा है।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।