नागपुर विश्वविद्यालय में बना इलेक्ट्रिक ट्रक, उद्योगों के भीतर 4 हजार किलो तक माल ढोने में होगा उपयोग

Nagpur University electric truck startup: राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर में उद्योगों के भीतर माल पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रिक ट्रक तैयार किया गया है। यह ट्रक 4,000 किलो तक माल ढो सकता है। इसमें 15 किलोवॉट की लिथियम फेरो फॉस्फेट बैटरी और स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम है। इसका पहला मॉडल भुसावल रेलवे लोकोशेड भेजा गया है।
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नागपुर विश्वविद्यालय में तैयार हुआ 4 हजार किलो माल ढोने वाला इलेक्ट्रिक ट्रक
Nagpur University electric truck startup: नागपुर, 28 अगस्त 2026। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर में उद्योगों के भीतर माल परिवहन के लिए बैटरी से चलने वाला इलेक्ट्रिक ट्रक तैयार किया गया है। कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर के हाथों शुक्रवार, 28 अगस्त को रिबन काटकर इस ‘इलेक्ट्रिक ट्रक’ स्टार्टअप का शुभारंभ किया गया।
महात्मा ज्योतिबा फुले शैक्षणिक परिसर स्थित इनक्यूबेशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रभारी कुलसचिव डॉ. विजय खंडाळ, आईक्यूएसी संचालक डॉ. नंदकिशोर करडे, इनक्यूबेशन सेंटर के संचालक डॉ. अभय देशमुख तथा शुभलक्ष्मी मेकाट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ रुद्राक्ष चौबे मौजूद रहे।
पेट्रोल-डीजल वाहनों से बढ़ते प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन को देखते हुए छात्र रुद्राक्ष चौबे ने वर्ष 2023 में विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर में शुभलक्ष्मी मेकाट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की थी। करीब दो वर्षों के प्रयास के बाद 4,000 किलोग्राम माल ढोने की क्षमता वाला यह इलेक्ट्रिक ट्रक तैयार हुआ।

मोबाइल पर देखी जा सकेगी ट्रक की बैटरी की स्थिति
ट्रक में 15 किलोवॉट क्षमता की लिथियम फेरो फॉस्फेट बैटरी लगाई गई है, जो 8 से 10 वर्ष तक चलेगी और 2 से 2.5 घंटे में पूरी तरह चार्ज हो जाती है। इससे ईंधन व रखरखाव खर्च घटेगा और उद्योगों की उत्पादन लागत कम होने की संभावना है।
ट्रक का पहला मॉडल भुसावल रेलवे लोकोशेड भेजा गया है, जहां आंतरिक सामग्री परिवहन में इसका उपयोग होगा। ट्रक में स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम है, जिससे मोबाइल पर बैटरी की स्थिति देखी जा सकती है। इसके अलावा आगे-पीछे चलने की गियर व्यवस्था, इमरजेंसी स्टॉप, पार्किंग ब्रेक, बैटरी एसओसी, इंडिकेटर, हॉर्न और सॉलिड टायर जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं।
कुलपति डॉ. मनाली क्षीरसागर ने इस पहल के लिए रुद्राक्ष चौबे का अभिनंदन किया। विश्वविद्यालय की यह पहल अन्य औद्योगिक इकाइयों को भी इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर प्रेरित कर सकती है।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

