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ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में खुद लड़ा केस, SIR प्रक्रिया को बताया बंगाल के खिलाफ साजिश

ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में खुद लड़ा केस, SIR प्रक्रिया को बताया बंगाल के खिलाफ साजिश
Mamata Banerjee Supreme Court: ममता बनर्जी ने खुद लड़ा केस, SIR को बताया बंगाल के खिलाफ साजिश (File Photo)

Mamata Banerjee Supreme Court: बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए खुद वकील बनकर सुप्रीम कोर्ट में SIR प्रक्रिया के खिलाफ दलीलें दीं। उन्होंने 58 लाख वोटर्स के नाम हटाए जाने को बंगाल के खिलाफ साजिश बताया। ममता ने सवाल उठाया कि 24 साल बाद अचानक यह प्रक्रिया क्यों शुरू की गई। अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।

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Asfi Shadab
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ममता बनर्जी का ऐतिहासिक कदम: खुद वकील बनकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं

बुधवार का दिन भारतीय न्यायिक इतिहास में एक खास दिन के रूप में दर्ज हो गया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक अनोखा कदम उठाते हुए खुद वकील के रूप में सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर अपने राज्य की तरफ से दलीलें पेश कीं। यह पहली बार था जब कोई सिटिंग मुख्यमंत्री वकील बनकर देश की सबसे बड़ी अदालत में पैरवी करने पहुंची। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को बंगाल के खिलाफ एक बड़ी साजिश बताया। उनका कहना था कि यह प्रक्रिया मतदाताओं को शामिल करने के लिए नहीं बल्कि उनके नाम काटने के लिए चलाई जा रही है।

चीफ जस्टिस ने दिया 15 मिनट का समय

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने जब ममता बनर्जी ने कार्यवाही शुरू करते हुए कहा कि वह राज्य की तरफ से हैं, तो चीफ जस्टिस ने मुस्कुराते हुए कहा कि इसमें किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए। जब मुख्यमंत्री ने अपना पक्ष रखने के लिए 5 मिनट का समय मांगा, तो चीफ जस्टिस ने उदारता दिखाते हुए कहा कि वह उन्हें 5 नहीं बल्कि 15 मिनट का समय देंगे। यह घटना अपने आप में इस सुनवाई की अहमियत को दर्शाती है।

58 लाख वोटर्स के नाम हटाए जाने का आरोप

ममता बनर्जी ने अपनी दलीलों में बताया कि SIR प्रक्रिया के तहत 58 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों के पास अपील करने का कोई विकल्प तक नहीं है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केवल बंगाल के लोगों को बुलडोज करने की साजिश रची जा रही है। उनका कहना था कि यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ वोटों को डिलीट करने के लिए बनाई गई है, न कि मतदाता सूची को साफ करने के लिए।

शादीशुदा बेटियों के नाम हटाने का मुद्दा

एक दिलचस्प और व्यावहारिक समस्या की ओर इशारा करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जब किसी लड़की की शादी होती है और वह ससुराल चली जाती है, तो वह अपने पति का सरनेम इस्तेमाल करने लगती है। लेकिन SIR प्रक्रिया में इसे भी मिसमैच माना जा रहा है और ऐसी शादीशुदा बेटियों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बहुत सी लड़कियों के नाम डिलीट कर दिए गए हैं जो ससुराल में शिफ्ट हुई हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जब कहा कि ऐसा नहीं हो सकता, तो मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि ऐसा ही हुआ है।

गरीबों और मजदूरों का नाम भी काटा गया

ममता बनर्जी ने बताया कि ऐसे गरीब लोगों के नाम भी हटा दिए गए हैं जो रोजी-रोटी कमाने के लिए बाहर गए हुए हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों को बहुत खुशी होगी अगर अदालत यह आदेश दे कि SIR में आधार कार्ड को भी एक मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अन्य राज्यों में डोमिसाइल सर्टिफिकेट और जाति प्रमाण पत्र भी मान्य किए जा रहे हैं, लेकिन सिर्फ बंगाल को ही टारगेट किया जा रहा है।

AI के इस्तेमाल से भी हो सकती है गलती

जब नाम में मिसमैच की बात चली तो चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि शायद अनुवाद करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया गया होगा और उससे भी ऐसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यह टिप्पणी बताती है कि तकनीकी प्रक्रियाओं में भी गलतियां हो सकती हैं और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।

24 साल बाद अचानक SIR क्यों

ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि जब 24 सालों से यह प्रक्रिया नहीं हो पाई थी, तो अब चुनाव से सिर्फ तीन महीने पहले इतनी जल्दी क्या है। उन्होंने कहा कि 4 राज्यों में चुनाव होने हैं और ऐसे वक्त में यह प्रक्रिया शुरू करना संदेहास्पद है। मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल फसल कटाई का सीजन चल रहा है और लोग यात्राएं कर रहे हैं। ऐसे समय में उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल होने के लिए बुलाया जा रहा है।

असम में SIR क्यों नहीं

ममता बनर्जी ने एक बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रक्रिया असम में क्यों नहीं हो रही है जहां भाजपा की सरकार है। उनका इशारा साफ था कि यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित है और सिर्फ विपक्षी दलों वाले राज्यों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग को वॉट्सऐप कमिशन भी कहा और आरोप लगाया कि आयोग मेसेजिंग ऐप के जरिए ही चुनाव अधिकारियों को आदेश दे रहा है।

100 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा

एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि SIR प्रक्रिया में 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ भी मर रहे हैं और कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। यह आंकड़ा इस बात को दर्शाता है कि यह प्रक्रिया कितनी दबाव भरी और तनावपूर्ण है।

9 फरवरी को अगली सुनवाई

चुनाव आयोग के वकील ने एक सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन बेंच ने कहा कि इस मामले में समय कम है और अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी। यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों रूप से बेहद अहम हो गया है। ममता बनर्जी का यह कदम न केवल उनके राजनीतिक साहस को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि वह अपने राज्य के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए कितनी गंभीर हैं।

इस पूरे मामले में यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला देती है और क्या आधार कार्ड को SIR प्रक्रिया में मान्य दस्तावेज के रूप में शामिल किया जाएगा। यह फैसला न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश में मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।