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पश्चिम बंगाल की बर्दवान में तृणमूल के दो गुटों में हिंसक झड़प, पुलिस के सामने हुई मारपीट

पश्चिम बंगाल की बर्दवान में तृणमूल के दो गुटों में हिंसक झड़प, पुलिस के सामने हुई मारपीट
TMC Internal Conflict: बर्दवान में तृणमूल के दो गुटों में हिंसक झड़प, पुलिस के सामने मारपीट (File Photo)

पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले में तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई। जिला परिषद सदस्य हाकिमुल इस्लाम और एससीएसटी सेल अध्यक्ष प्रदीप मंडल पर हमला किया गया। पुलिस की मौजूदगी में भी हिंसा हुई और गाड़ी तोड़फोड़ की गई। घटना ने पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पार्टी में आंतरिक कलह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बर्दवान जिले में पार्टी के दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर पार्टी के भीतर चल क्या रहा है। ताजा घटना में जिला परिषद सदस्य और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर हमला किया गया और पुलिश की मौजूदगी में भी हिंसा को रोका नहीं जा सका।

घटना की शुरुआत कैसे हुई

मामला तब शुरू हुआ जब तृणमूल के कार्यकर्ता ओदुद मोल्ला ने जिला अध्यक्ष शुभाशीष चक्रवर्ती से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद शौकत मोल्ला के करीबी नेताओं ने ओदुद मोल्ला के घर पर हमला कर दिया और उन्हें गालियां दीं। यह घटना कल की है लेकिन इसका असर अगले दिन भी देखने को मिला।

आज सुबह जब जिला परिषद सदस्य हाकिमुल इस्लाम और एससीएसटी सेल के अध्यक्ष प्रदीप मंडल ओदुद मोल्ला से मिलने उनके घर पहुंचे तो शौकत मोल्ला गुट के नेता फिर से वहां जमा हो गए। उन्होंने घर के सामने जमकर हंगामा किया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

पुलिश की मौजूदगी में भी हुई मारपीट

स्थिति को संभालने के लिए उत्तर काशीपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन पुलिस के साथ भी शौकत मोल्ला गुट के नेताओं ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। पुलिस ने हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए हाकिमुल इस्लाम और प्रदीप मंडल को ओदुद मोल्ला के घर से बाहर निकाला।

जैसे ही दोनों नेता बाहर निकले, शौकत मोल्ला गुट के समर्थक उन पर टूट पड़े। आरोप है कि हाकिमुल इस्लाम की गाड़ी पर हमला किया गया और प्रदीप मंडल को मारने की कोशिश की गई। पुलिस ने किसी तरह उन्हें वहां से सुरक्षित निकाला।

रास्ते में फिर से हुआ हमला

हाकिमुल इस्लाम जब अपने पोलेरहाट स्थित पेट्रोल पंप की ओर जा रहे थे तो रास्ते में एक और घटना हो गई। वन विभाग के कार्यकर्ता खैरुल इस्लाम ने आरोप लगाया कि हाकिमुल की गाड़ी ने उन्हें जानबूझकर टक्कर मारने की कोशिश की। हालांकि हाकिमुल इस्लाम ने इस आरोप को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

इस घटना के बाद खैरुल इस्लाम और उनके समर्थकों ने हाकिमुल की गाड़ी का पीछा किया और पेट्रोल पंप पर पहुंचकर प्रदीप मंडल की बुरी तरह से पिटाई कर दी। आरोप है कि उन्हें बेरहमी से मारा गया।

पार्टी के भीतर बढ़ती दरारें

यह घटना तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे गुटबाजी की ताजा मिसाल है। पार्टी में एक तरफ शौकत मोल्ला का गुट है तो दूसरी तरफ अन्य नेताओं का समूह। दोनों गुटों के बीच सत्ता और प्रभाव को लेकर टकराव चल रहा है।

जिला अध्यक्ष शुभाशीष चक्रवर्ती से मिलने वाले नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। यह साफ इशारा है कि पार्टी के भीतर एक गुट दूसरे गुट को दबाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस मामले में क्या कदम उठाएगा।

कानून व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने कानून व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की मौजूदगी में भी हिंसा हुई और नेताओं की पिटाई की गई। यह दर्शाता है कि या तो पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई या फिर उन पर दबाव था।

विपक्षी दलों ने इस घटना पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब सत्ताधारी पार्टी के नेता ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम लोगों की सुरक्षा का क्या होगा। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पार्टी की छवि पर असर

तृणमूल कांग्रेस के लिए यह घटना छवि के लिहाज से भी नुकसानदेह है। पार्टी में अनुशासन की कमी और गुटबाजी की ऐसी खबरें जनता के बीच नकारात्मक संदेश देती हैं। खासकर जब चुनाव नजदीक हों तो ऐसी घटनाएं पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।

पार्टी नेतृत्व को इस मामले में सख्त रुख अपनाना होगा। सिर्फ बयान देने से काम नहीं चलेगा बल्कि ठोस कार्रवाई करनी होगी। गुटबाजी करने वाले नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दूसरों को सबक मिले।

आगे क्या होगा

फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या दोषी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई होगी या फिर मामला दबा दिया जाएगा। स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं की नजरें अब पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं।

पुलिस ने कहा है कि वह मामले की जांच कर रही है और जल्द ही कार्रवाई करेगी। लेकिन अतीत में ऐसे कई मामलों में कार्रवाई ठीक से नहीं हुई है। इसलिए लोगों में विश्वास की कमी है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि राजनीतिक दलों को अपने घर को व्यवस्थित रखना जरूरी है। आंतरिक कलह और गुटबाजी न सिर्फ पार्टी के लिए बल्कि लोकतंत्र के लिए भी खतरनाक है। जनता चाहती है कि नेता उनकी समस्याओं पर ध्यान दें न कि आपसी लड़ाई में उलझे रहें।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।